Library


उच्च माध्यमिक विद्यालय में पुस्तकालय के लिए एक बडा हॉल है जिसमें तीन दरवाजे व पांच खिड़कियाँ बनी हुई है । पुस्तकालय में उचित बिजली व फर्नीचर की व्यवस्था है पुस्तकालय में छात्राओं को अध्ययन हेतु 50 कुर्सियां व 20 अलमारियों लगी हुई है ।


पुस्तकालय में विभिन्न पत्र पत्रिकायें आती है जिनमें तीन दैनिक भास्कर और साप्ताहित इण्डिया टू डे, पाक्षिक, चंपक, बालहंस, गृहशोभा, सरिता व मासिक नन्दन, सुमन सौरभ, प्रतियोगिता दर्पण, सहेली, मुक्ता और त्रैमासिक निरोगधाम पत्रिका आदि आती है ।


पुस्तकालय में लगभग 2900 (अक्षरे उनतीस सौ) पुस्तके व्यवस्थित है छात्रायें पुस्तकालय में बैठकर इनका अध्ययन करती रहती है इनको पुस्तकें आठ दिन के लिए दी जाती है और आवश्यकता होने पर आगे समय बढा दिया जाता है ये पत्रिकायें भी दी जाती रहती है ।


शिक्षकायें भी रिक्त कालांश में पुस्तकालय आकर विविध प्रकार की पत्र पत्रिकायें पढ कर ज्ञानार्जन करती है आवश्यकता पडने पर किताबे दी भी जाती है। पुस्तकालय में विभिन्न महापुरषों के चित्र लगे हुये है एवं उनके उत्तम विचार भी पुस्तकालय की दीवारों पर लिखें हुये है । जिससे छात्रायें उनके विचारों अपने जीवन मे अनुसरण कर सके ।


पुस्तकालय सिर्फ पुस्तकों का घर अर्थात पुस्तकों को संग्रहीत करने का स्थान ही नहीं होता वरन वह किसी भी विद्यालय का ह्दय व आईना होता है जो यह प्रमाणित करता है कि छात्रों का बौद्धिक स्तर क्या है और अध्यापन की उच्चता किस शिखर तक है ।


इस आधार पर मैं गर्व के साथ कह सकती हॅू कि हमारे विद्यालय का पुस्तकालय इस कसौटी पर खरा उतरता है अन्त में मुझे विश्वास है कि छात्राओं के बौद्धिक विकास व मानसिक विकास में पुस्तकालय का विशेष योगदान रहा है ।